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Showing posts from July, 2023

कोथली देखने ज़रूर आना

                   दादी हर रोज़ नहा-धोकर बाहर दरवाज़े पर ही खाट  बिछाकर बैठ जाती थी । “आते-जाते लोगों को देखती रहती” ।        पर अब कुछ दिनों से वह बेचैन सी टहल रही थी ।                 “कभी चारपाई पर बैठ जाती, तो कभी डण्डे को पकड़कर, सड़क तक जाकर  फिर से वापस लौट आती” ।             फिर बैठकर इधर-उधर देखने लग जाती । “दो-तीन दिन तो मैं भी सब देखती रही” ।              एक दिन लगा कि पूछ ही  लेती हूँ । “आख़िर बात क्या है ?  जो इतना परेशान रहने लगे हैं” ।थोड़ा समय निकालकर उनके पास जा पहुँची ।  “उनकी परेशानी  जानने के लिए” ।              ज्यों ही उनके पास पहुँची । नमस्ते...

रेहड़ी की बोहनी

                   एक दिन सैर करते हुए पब्लिक पार्क की तरफ ही चल  दिये ।  पार्क के पीछे वाले गेट पर सब्ज़ियों की काफ़ी रेहडियां  खड़ी थी ।        “सब्ज़ी भी ले ही लेते हैं,  सोचकर फिर उधर ही मुड़ गए ” ।                  उन सब्ज़ी वालों में से कुछ ग्राहक का इंतज़ार कर रहे थे । “कुछ चादर तानकर बैंच पर   सो भी रहे थे” । लेकिन सब्ज़ी पर पानी डालकर  बोरी तो सभी ने ढकी हुई थी ।                “एक वृद्ध सब्जीवाला बार-बार बोरी उठाकर सब्ज़ी देखे जा रहा था” । फिर सबको सलीक़े से लगाने की कोशिश करता । फिर से ढक कर,  इधर-उधर नज़र मारने लगता ।      “आगे पीछे दोनों गलियों पर नज़र थी उसकी ।            ...

सच में बाप बन गया

              “जगत” रमेश की इकलौती औलाद था । “उसे जगता ही बोलते थे” सारे  परिवार वाले  ।                पढ़ा-लिखा नहीं था जगता  । “स्कूल ख़त्म होने तक उसकी माँ  गेट के बाहर बैठी रहती थी” ।           कभी स्कूल से बाहर न भाग जाएं ।  “कोशिश तो बहुत की माँ-बाप ने” पर नहीं पढ़ा ।                   गांवों में  “ख़ाली बैठकर, नशेड़ी बन रहे थे गाँव के जवान बच्चे” ।  पर वक़्त रहते , रमेश ने तो उसे अपने काम धंधे में साथ ही लगा लिया ।           “हर बुरी संगत से बचाकर चल रहे थे” । इसीलिये  उसकी जल्द ही शादी भी कर दी  ।        “ताकि घर- परिवार में व्यस्त हो जाए” ।     ...

नन्हा सा दोस्त

             सुजाता को दादी ने ही पाल-पोस कर बड़ा किया था ।   “वह, पापा और भाई रोहन ,  दादा-दादी के साथ ही रहते थे” ।           सबकी लाड़ली थी सुजाता । “घर में भाई के साथ लड़ती भी ख़ुद थी और उसको डांट भी पड़वा देती थी” ।              जब वह पैदा हुई थी तो, उसकी माँ का अस्पताल में ही देहांत हो गया था । तभी से उसकी दादी ने ही,  माँ बनकर बच्चों को संभाला ।         “सुजाता के पापा ने दूसरी शादी से साफ़ इंकार कर दिया” । किसी के समझाने से भी नहीं माने ।               सब ऐसे ही चलता रहा । “सुजाता अपनी दादी के बिना ना सोती थी, ना खाती थी” । बहुत लाड़ प्यार से पल रहे थे दोनों बच्चे।        “दोनों बहन भाई एक ही स्कूल में जाते थे”।      ...