दरवाज़े के पीछे
बहुत मज़बूत दिल की महिलाओं में आती थी वह । “कह सकते हैं— दिल पर पत्थर रखकर आगे बढ़ने वाली”। आज भी बार-बार अपने इष्ट देव को याद कर रही थी ॥ “अपने परिवार के गुनाहों की माफ़ी माँग रही थी” । सारा घर लोगों से भरा हुआ था । पास-पड़ोसी ,रिश्तेदार सब आ चुके थे । “बड़े से कमरे के बीच में उनके पति का पार्थिव शरीर दर्शनों के लिए रखा हुआ था” । बीच- बीच में उनके मुँह की तरफ़ भी देख जाती थी । “थोड़ी देर के लिए दिल भी भर आता” ,फिर खुद पर क़ाबू पाकर अपने इष्ट देव को याद करने लग जाती । “इनको अपनी शरण में रखना ,दुबार...