बुआ का रौब
उमर यही कुछ 85 साल तो हो चुकी होगी उनकी । “लेकिन लग नहीं रही थी । अभी भी वही रोबीली आवाज़” । ऐसे ही आँखों से घूरकर देख रहे थे । सब वैसा ही तो था । “जैसा 50 साल पहले होता था” । इनके देखने मात्र से डर लगता था हमें भी । “मुँह से शब्द भी नहीं निकाल पाते थे” । एक बात बोलती थी हमेशा—“तेरे बाप की बड़ी बहन हूँ मैं , कहना मान लिया करो मेरा” । और हम पिटाई के डर से चुप रह जाते थे । आज तीन-चार साल बाद देखा उनको । सबसे मिलने के बाद हम उनसे मिलने गए । “तो आज भी वैसे ही ग़ुस्से से घूरते ही मिली” । ...