Posts

Showing posts from March, 2024

बुआ का रौब

                        उमर यही कुछ 85 साल तो हो चुकी होगी उनकी । “लेकिन  लग नहीं रही थी । अभी भी वही रोबीली आवाज़” ।           ऐसे ही आँखों से घूरकर देख रहे थे । सब वैसा ही तो  था । “जैसा  50 साल पहले होता था” ।          इनके देखने मात्र से डर लगता था हमें भी । “मुँह से शब्द भी नहीं निकाल पाते थे” ।                   एक बात बोलती थी हमेशा—“तेरे बाप की बड़ी बहन हूँ मैं , कहना मान लिया करो मेरा” । और हम पिटाई के डर से चुप रह जाते थे ।                    आज तीन-चार साल बाद देखा उनको । सबसे मिलने के बाद हम उनसे  मिलने  गए । “तो आज भी वैसे ही ग़ुस्से से घूरते ही मिली” ।  ...