समय से पहले
आदेश आज बैठे- बैठे अपने पुराने दिनों को याद कर रहा था । “वह नौ-दस साल का ही रहा होगा, जब उन्होंने इस शहर में शिफ़्ट किया” । उससे पहले का जीवन उसको ज़्यादा याद भी तो नहीं था । “बस थोड़ा-बहुत धुँधला सा, जैसे गली में नुक्कड़ की चीज़ों वाली दुकान” । इस शहर में आकर तो जैसे समय को पंख लग गए । पड़ोस में बहुत सारे बच्चे थे । कुछेक तो उसके दोस्त बन गए । “लेकिन एक-दो को लगता था कि वह पैसे और रुतबे में से उससे कहीं ऊपर है” । “आदेश से अच्छे से बात भी नहीं करते थे ” । बार-बार महसूस कराते रहते । “इसके तो...