फादर्स डे अधूरा ही रह गया
सब बच्चे उनसे बात करने के लिए फ़ोन कर रहे थे । आज फादर्स डे था ना इसलिए । “उनको भी पहले, कहाँ ही पता था। बिल्कुल अनजान थे इससे । “पहला फ़ोन आया तो पता चला कि आज फादर्स डे हैं” । फिर तो उनका ध्यान फ़ोन पर ही रहा । क्या पता “कब फ़ोन की घंटी बजे और उनको सुनाई न दे” । अपनी दिनचर्या निपटाकर ,खाना खाकर अपनी मित्र मंडली के पास जाने को तैयार तैयार होने लगे । “चलने से पहले अपने फ़ोन की घंटी देखीं, कभी धीरे हो गई हो” । दोस्तों के पास पहुँचते ही सबको फादर्स डे की बधाई भी दी । फिर बोलते —“लो भाई एक त्योहार और ...