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Showing posts from October, 2023

जी तो लूँ

                   उसे अब भी बहुत चाव था  सजने सँवरने का, “बिलकुल पहले की ही तरह” ।  बार-बार सीसा  देखकर कपड़े- बाल ठीक करती रहती थी ।     “फिर हंसकर बोलती— कुछ ज़्यादा तो नहीं लग रहा”  ।                     बस बाल थोड़े सफ़ेद हो गए है । कमज़ोरी से चेहरे पर लाइन दिख रही है । पर ये तो,  उम्र के हिसाब से होता ही है ।        यह तो बड़ी बात नहीं है ‘सबके साथ ही होता है’ ।       “बीमारी को अपने ऊपर हावी तो नहीं होने दूंगी , चाहे कुछ भी हो जाए” ।                    ‘आगे तो जितने साँस भगवान ने देने है  उतने तो रहेंगे ही’ ।  वो  तो कहीं जाने से रहे ।       फ...

उसकी हड़बड़ाहट

                    मेहमान भी बहुत थे ,पर सब चुपचाप । बार बार समय देख रहे थे, जैसे वक़्त  बीतने का इंतज़ार कर रहे हो ।     “लेकिन नितिन के  चेहरे पर बेचैनी झलक रही थी” । सब कुछ जल्दी- जल्दी निपटाना चाहता था ।                   सारी रस्मे, सब रिवाज़ ।  बिना बैठे,  एक घंटे तक करने को कह दिया रिश्तेदारों को । “कृपया करके बैठे नहीं ,सब निपटाना है जल्दी जल्दी” ।      ख़ुद भी तूफ़ान की तरह ही तो घूम रहा था ।                   कंधे पर बैग भी टाँग रखा था । “शायद ज़रूरी सामान होगा जो, कहीं रखना भी नहीं चाहता था” । उसकी हड़बड़ाहट सबको बेचैन कर रही थी ।                 तभी किसी ने...