जी तो लूँ
उसे अब भी बहुत चाव था सजने सँवरने का, “बिलकुल पहले की ही तरह” । बार-बार सीसा देखकर कपड़े- बाल ठीक करती रहती थी । “फिर हंसकर बोलती— कुछ ज़्यादा तो नहीं लग रहा” । बस बाल थोड़े सफ़ेद हो गए है । कमज़ोरी से चेहरे पर लाइन दिख रही है । पर ये तो, उम्र के हिसाब से होता ही है । यह तो बड़ी बात नहीं है ‘सबके साथ ही होता है’ । “बीमारी को अपने ऊपर हावी तो नहीं होने दूंगी , चाहे कुछ भी हो जाए” । ‘आगे तो जितने साँस भगवान ने देने है उतने तो रहेंगे ही’ । वो तो कहीं जाने से रहे । फ...