Posts

Showing posts from February, 2025

उसकी खुशियों की चाबी

                     आज ही नीचे पार्क में घूमते देखा उनको । अकेली नहीं थी । “छोटी बच्ची थी साथ में , यही कुछ चार- पाँच साल की होगी” ।        उसके साथ इतनी ज़्यादा व्यस्त थी कि “आने-जाने वालों को भी नहीं देख रही थी” ।                    बस उसको ही निहार रही थी । “और बच्ची भी अपनी एक -एक चीज़ दिखा रही थी । दादी —देखो मेरी क्लिप्स , देखो मेरी चूड़ियाँ” ।      “अरे दादी- आपने सेंडिल तो  देखीं ही नहीं”।                    और वह इन सब में इतनी खोईं हुई थी कि मेरे बार- बार पुकारने पर भी नहीं सुना । “तब मैंने पास जाकर कंधे से हिलाया” ।   कब से आपको आवाज़ लगा रही हूँ । आपको पता ही नहीं चल रहा ।       ...