हैप्पी लास्ट दिन
फिर से नया साल आने वाला है । पुराने के बस 10 /11 दिन ही तो बचे हैं । “लेकिन साथ ही बच गईं बहुत सारी ख़्वाहिशें ,सपने” । कह सकते हैं कि उम्मीद जगा कर नए साल का स्वागत किया था । “एक डायरी तो स्पेशल इसलिए लगायी थी कि जो याद आता रहेगा, साथ-साथ लिखते भी रहेंगे और महीने के हिसाब से पूरा भी कर लेंगे “। सोच ही रही थी कि खिड़की से थोड़ी सी धूप चमकती हुई दीवार पर दिखाई दी । जो सूरज के घूमने के साथ-साथ घूमती जाएगी फिर धीरे से ग़ायब भी हो सकती है । लेकिन फिर यह ख़्याल भी आया है कि कल जब आएगी तो पहले ही आकर बैठ ...