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Showing posts from January, 2024

अचूक मंत्र

                    अरे ,  यह तो रमेश चाचा हैं । “लेकिन बारिश में क्यों घूम रहे हैं” ?   सिर पर बोरी ओढ़कर बारिश से बचने की कोशिश में भी है ।      “पाजामा भी घुटनों तक चढ़ा रखा है” ।       चप्पलें हाथ में लटकाकर, गीली मिट्टी से बचना चाह रहे है ।                   दूर से तो ऐसा लग रहा है “जैसे पेड़ों के नीचे  रुककर कुछ ढूँढ रहे हैं, चौकन्नी सी नज़रों से” ।        एक-एक  जगह को  देखते चल रहे है ।       “बहुत देर तक उनको ही देखती रही ,टकटकी लगाकर” ।                     कहीं उनको कोई परेशानी तो नहीं है ?  “लेकिन इतनी दूर से आवाज़ भी लगाती तो शायद वो नहीं सुन ...

छनछनाती पाज़ेब

                    जब भी घर के बाहर खड़े होते , “उसे यूँ ही साइकिल पर कपड़े लाद कर जाते हुए ही देखते”।      दोनों बहन -भाई अपने चाचा के साथ कपड़े प्रेस करने का काम  करते थे ।                     “बारी-बारी से आते थे कपड़े लेने और देने” । उनके चाचा को तो बस, बड़ी सी मेज़ पर कपड़े प्रेस करते  हुए ही  देखा था ।          बुज़ुर्ग  तो नहीं है इतने । “लेकिन  दिन-रात मेहनत ने शायद शरीर का हुलिया ही बदल दिया है”।                      वैसे तो प्रेस वाली लड़की का नाम रितु है । “जब भी मिलती हैं बस हल्का सा मुस्कुरा देती है” ।  और नमस्ते करके बड़े ही आत्मविश्वास  से बात करती है ।   ...