अचूक मंत्र
अरे , यह तो रमेश चाचा हैं । “लेकिन बारिश में क्यों घूम रहे हैं” ? सिर पर बोरी ओढ़कर बारिश से बचने की कोशिश में भी है । “पाजामा भी घुटनों तक चढ़ा रखा है” । चप्पलें हाथ में लटकाकर, गीली मिट्टी से बचना चाह रहे है । दूर से तो ऐसा लग रहा है “जैसे पेड़ों के नीचे रुककर कुछ ढूँढ रहे हैं, चौकन्नी सी नज़रों से” । एक-एक जगह को देखते चल रहे है । “बहुत देर तक उनको ही देखती रही ,टकटकी लगाकर” । कहीं उनको कोई परेशानी तो नहीं है ? “लेकिन इतनी दूर से आवाज़ भी लगाती तो शायद वो नहीं सुन ...