सरदार जी अशोक
गली के एक छोर से दूसरे छोर तक पूरी निगरानी रखता था अशोक । “मजाल है कोई उसे बिना पूछे किसी के घर की घंटी बजा दें” । आने-जाने वाले सब पर नज़र रखता । जब कोई बोलकर जाता — घर का ध्यान रखना । तो उसके दिमाग़ में एक बात बैठ जाती थी कि “भरोसा करके ही कह कर गए हैं” । ध्यान रखना मतलब— उनके वापिस आने तक ज़िम्मेदारी और बढ़ गई । “फिर तो ज़्यादा चौकस होकर ड्यूटी करता” । अशोक के बाल इतने बड़े नहीं थे ,ना ही वह सिख लगता था । “लेकिन हमेशा ड्यूटी पर पगड़ी पहनकर ही आता था” । एक दिन ...