Posts

Showing posts from July, 2025

घर के दरवाज़े

                       आज उसको घर के दरवाज़े बंद करते हुए देखा जो ज़्यादातर खुले पड़े रहते थे ।  वैसे तो साल-भर मिलते रहते हैं ।       “लेकिन कल वाली  “सोनी” को देखा  तो लग ही नहीं रहा था कि वह पहली वाली ही है” ।      ऐसा लगा कि  उसको कभी समझ ही नही पाये ।                        “दिल करता उसका तो , अच्छे से बोल लेती नहीं तो मुँह फेरकर निकल जाती थी” । अभी तो धीरे-धीरे   उसके रहन-सहन का पता चल रहा था ।       चुलबुली सी भी है तो कभी बिल्कुल चुप -चाप रहने वाली ।    कभी कभार ऐसे लगता “जैसे बहुत कुछ गंवाकर बैठी है अपनी ज़िंदगी में” ।                   ...