बिल्कुल बेफिक्र
किसी ने देखा क्या उसको —सब आपस में यही फुसफुसा रहे थे । अब भी वैसा ही है , वैसे ही बात करने का लहजा भी । “बहुत देर तो मैं सोचती ही रही कि ऐसा कौन है जिसकी चर्चा आज सबकी ज़ुबान पर हो गई है”। शादी का माहौल था । “पर बात उसकी हो रही थी”। “दुनिया भर के रिश्तेदार बैठे थे लेकिन ज़िक्र उसका चल रहा था”। लो भाई आज के विषय का इंतज़ाम भी हो गया । अब कोई भी रिश्तेदार शादी में बोर नहीं होगा —“किसी ने हँसते हुए कहा”। तभी मुस्कुराते हुए वह हमारी तरफ़ आता दिखा । “चुप-चुप —सभी ने एक दूसरे को टोका । इधर ही आ रहा है”। ज्यों ही मैंने मुड़कर देखा ठीक मेरे पीछे ही खड़ा था । “वह बहुत खुश था सबसे मिलकर” । मैंने भी मुड़ते ही उन्हें...