कुछ ही पलों में
अनुराग ऑफिस से घर आते ही अपने कमरे में चला जाता था । जब भी सुधा चाय-पानी पूछने जाती ,तो सोने की कोशिश करने लगता । जैसे न कुछ सुनना ,न ही कुछ बताना । “अपने बेटे का यह रवैया उससे सहन नहीं हो रहा था” । बहुत दिन ऐसे ही निकल गए । “ लेकिन बेटे के कमरे में जाना नहीं छोड़ा सुधा ने ” । एक बार तो ज़रूर कोशिश करती बात करने की । “जब भी माँ कमरे से बाहर जाती , आँखों में पानी के लिए बैठ जाता था” । उनसे बात करने की हिम्मत ही नहीं थी । “ कैसे बताए कि वह तो किसी ऑफ़िस में जाता ही नहीं” । इस समय उसके पास कोई नौकरी वग़ैरह नहीं है । ...