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Showing posts from September, 2023

कुछ ही पलों में

                   अनुराग ऑफिस से घर आते ही अपने कमरे में चला जाता था ।    जब भी सुधा  चाय-पानी पूछने जाती ,तो सोने की कोशिश करने लगता ।     जैसे न कुछ सुनना ,न ही कुछ बताना ।                  “अपने बेटे का यह रवैया उससे सहन नहीं हो रहा था” । बहुत दिन ऐसे ही निकल गए ।        “ लेकिन बेटे के कमरे में जाना नहीं छोड़ा सुधा ने ” । एक बार तो ज़रूर कोशिश करती बात करने की ।                 “जब भी माँ कमरे से बाहर जाती , आँखों में पानी के लिए बैठ जाता था” ।  उनसे बात करने की हिम्मत ही नहीं थी ।          “ कैसे बताए कि वह तो किसी ऑफ़िस में  जाता ही नहीं” ।  इस समय उसके पास कोई नौकरी वग़ैरह नहीं है ।   ...

अब उंगली की बारी तुम्हारी

                    बहुत समय हो गया वापिस आए हुए ।  पर “ऐसा लगता है, जैसे  अब भी वहीं पर ही है” ।   सब दिनचर्या   ऐसे ही चल रही है ।     वक़्त तो बहुत जल्दी बीत गया । पता ही नहीं चला । “लेकिन यह यात्रा यादगार बन गई” ।        सुबह होते ही “नमस्ते” से दिन की शुरुआत ।             “फिर दुबारा  दवाइयाँ याद दिलाना ” ।   फिर दोनों के स्वास्थ्य का पता करना ।     आप भी सोच रहे होंगे , “किसके लिए इतनी चिंता हो रही है” ।          जिसको हर चीज़ ऐसे याद  करवाई गई ।       “पहले ख़ुद  याद करना” और फिर उनको याद करवाना ।               कुछ तो समय की अनियमितता , देश के हिसाब से। वहाँ दिन तो अप...

वीजा की मोहर

                    थके-हारें भारी बैग लेकर सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे । “उत्साहित इतने कि कब सीढ़ियाँ ख़त्म हो गई ध्यान ही नहीं गया”।            बहुत सारा सामान ख़रीद कर लाये थे ।  बहू-बेटा और पोता-पोती के लिए ।                अभी तो सामान लगाना भी है —बैठकर दोनों एक-दूसरे को बोल रहे थे । “सब याद से रखना , कभी यही ना भूल जाएं” ।      पासपोर्ट आगे मेज पर रख लो ।     चाय का कप हाथ में लेकर,  ऐसे ही बातें करने लगे ।            कब से बच्चों के पास जाने का  इंतज़ार कर रहे थे । “अब मौक़ा मिला है जाने का” ।       बच्चों के साथ बहुत मस्ती करेंगे बच्चे बनकर ।   “क्या बच्चे भी हमें देखकर इतने ही ख़ुश होंगे”  ? दिमाग़ भी पता ...