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मैं काम वाली का बेटा

                        वह  सब बच्चों से  आगे  भाग-दौड़ कर रहा था । “एक-एक रास्ता ,सीढ़ियाँ ,सब कुछ ही पता था उसको” ।       बच्चे जब भी कुछ खाते  तो साथ में उसे भी दे रहे थे ।                           “जहाँ सब बैठते  बैड, सोफा  या फिर कॉलिन , वह भी बीच में ही  बैठा मिलता” । हमने उसको पहले तो कभी नहीं देखा था ।                   हैरानी तो तब हुई , जब हम बच्चों को बुलाकर उनसे मैथ्स के सवाल पूछ रहे थे  । पहेली बना-बना कर ।         “ उनको  गेम बता कर व्यस्त कर रहे थे ताकि कोई भी तोड़फोड़ न करें”  ।       ...