एक अरसे बाद
अलग ही अनुभव था आज , बहुत सालों बाद रेलवे स्टेशन पर जाना । “एक बार तो ऐसा लगा जैसे ऐसी जगह तो मैं कभी आयी ही नहीं” । “मुझे एक ही रेलवे स्टेशन याद था , वह भी मेरे बचपन वाला” । छोटी सी जगह पर टिकट का कमरा और इंतज़ार करने वालों के लिए खुली जगह । “और एक छोटा सा प्याऊ” । प्याऊ समझ रहे होंगे आप ? “वही जो मटके को गिली बोरी से ढककर उसको ठंडा रखते हैं” । उसी के साथ लुटिया बाँधकर रखी होती है ताकि कोई उसको में साथ न ले जाएं । “पता नहीं आजकल कहीं है या नहीं” । रेलवे स्टेशन के दोनों तरफ़ खुला कच्चा रास्ता । “बहुत दूर जाकर कहीं पककी सड़क थी” । आज तो ए...