उनकी पुरानी और हमारी नई
आज पूरे मोहल्ले के बच्चों को अपने आंगन में इकट्ठा किया हुआ था समर ने । कल ही सबकों खेलते समय बोल दिया था । “ कल शाम के 5 बजे सब आ जाना मेरे घर पर” । अपनी माँ को भी काम पर लगा रखा था । “उठकर जाने की कोशिश करती तो भाग कर चिपक जाता । “ माँ -माँ थोड़ी देर और करवा दो ना” । अब सभी किताबों को सामने वाली मेज़ पर जँचा रहा था । “अपने दोस्तों को जो दिखानी थी” । उनपर साफ़-सुथरे अख़बार भी चढ़ा दिए थे । “अपना नाम , स्कूल का नाम , साल व विषय सब लिख दिया थ । “...