आप भी तो टिप दोगे ना
लंबा सफ़र हो तो कहीं न कहीं रुकना ही पड़ता है । “चाहे बैठ कर चाय ही क्यों ना पीनी पड़ें” । वैसे अबकी बार रुकने का मन तो नहीं था क्योंकि सड़क के दोनों ओर बहुत अच्छे दृश्य थे । “ सड़कें भी बहुत अच्छी बनी हुई थी” । बिना रुके भी जाया जा सकता था । “लेकिन दिल किया और कार की ब्रेक लगा भी दी” । सोचा, एक बार घूमकर देख लेते क्या है इस ढाबे पर । “ फिर बैठकर चाय का ऑर्डर भी दे दिया” । तभी साथ वाली टेबल से लोगों का ग्रुप खाना खाकर उठकर चला गया । “बहुत शोर मचाया हुआ था । हमारी तरह घुमने-फिरने वाले दिख रहे थे” । ...