आख़िरी मुलाक़ात
काफ़ी समय से नहीं बल्कि 8/9 महीने से “उन शांत से स्वभाव वाले अंकल को नहीं देखा था” । वैसे उनके बारे में इतना जानती भी नहीं थी । “फिर भी उनके साथ अपनापन-सा महसूस होता था”। बस बहुत बार घूमते-फिरते मिल जाते थे । अक्सर पार्क में , बैंच पर बैठे हुए देखती थी उनको । कई बार राशन -सब्ज़ी लेकर आते हुए भी मिलते । “मिलते थे हमेशा मुस्कुराकर ही और कभी-कभी सिर पर हाथ रखकर जाते “। याद है हमें एक बार की बात । हम किसी सत्संग से वापिस आ रहे थे । तभी रास्ते में अंकल मिले । ह...