Posts

Showing posts from April, 2025

आख़िरी मुलाक़ात

                          काफ़ी समय से नहीं बल्कि  8/9 महीने से “उन शांत से स्वभाव वाले अंकल को नहीं देखा था” ।                   वैसे उनके बारे में इतना जानती भी नहीं थी । “फिर भी उनके साथ अपनापन-सा महसूस होता था”।      बस बहुत बार घूमते-फिरते मिल जाते थे । अक्सर पार्क में , बैंच पर बैठे हुए देखती थी उनको ।                        कई बार राशन -सब्ज़ी लेकर आते हुए भी मिलते ।  “मिलते थे हमेशा मुस्कुराकर ही और  कभी-कभी सिर पर हाथ रखकर  जाते “।                         याद है हमें एक बार की बात । हम किसी सत्संग  से वापिस आ रहे थे । तभी रास्ते में अंकल मिले । ह...