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ठाली

                        वैसे तो मैं सैर करते हुए सबसे मिलते हुए ही चलती हूँ । “हाँ ये बात ज़रूर हैं कि ज़्यादा देर खड़ी नहीं होती । लेकिन मिलती ज़रूर हूँ सबसे” ।    आज  उस समूह की मित्र मंडली से कुछ देर बात की । यही कुछ नौ/दस  दोस्तों का समूह था ।                        जो  हर रोज़ एक दूसरे को फ़ोन करके इकट्ठे होने का समय तय करते है । साथ-साथ घूमते रहते है ।        “फिर घर जाने से पहले सीमेंट के  बेंचों पर बैठकर गपशप करते है”।     “मैं सोचती थी कि उनकी ज़िंदगी बिलकुल बेफिक्र होगी” ।                       क्योंकि उनके बच्चों के भी बच्चे बड़े हो गये।  “उनकी...