दिल से इज़्ज़त
आज फिर से, उन्हीं के बारे में सोच रही थी।कुछ रिश्ते ऐसे भी होते है जिन्हें भगवान ने पहले से ही बना रखा होता है और उनका आपसी प्यार बेशक़ीमती होता है जिसकी कोई मिसाल नहीं मिलती । ये बेमिसाल प्यार उनका,जिन्हें ‘‘सौतेली माँ और सौतेली बेटी’’ में बाँटा गया। वह बहुत ही छोटी थी जब उसकी माँ का देहान्त हो गया। वह बेसहारा तो नहीं थी पर “उसे माँ की कमी खलती थी”। बच्चों को माँ की गोद में बैठे देखती तो, उसको भी उम्मीद रहती । आख़िर भगवान ने उसकी सुन ली और ‘‘उसकी भी ज़िंदगी में माँ आ गई”। पहले तो “झिझक के कारण” उनके पास नहीं जाना चाहती थी, पर धीरे -धीरे प्यार पनपता चला गया ‘‘और अब उसे भी माँ मिल गई’’। फूलों के साथ कांटे भी पीछे कयूं रहने लगे।आख़िर मोहल्ले की एक-दो औरतों ने मिलकर दोनों के बी...