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अगला मेला

                          अबकी बार ,  इस साल तो मेले ही मेले मिले जाने को । एक दीवाली के बाद शुरू हुआ तो उसके ख़त्म होते दूसरा शुरू ।    “किसी शादी समारोह से कम नहीं थे । कोई सरस मेला तो कोई जयंती मेला” ।                      मेले में जाने वाले जितने उत्साहित थे,वहाँ बैठे दुकानदार उनसे भी ज़्यादा ।  “मजाल कोई उनकी दुकान के आगे से बिना रुके निकल जाए”।       दूर से ही ग्राहक की आँखों के देखने के तरीक़े से ही पहचान लेते हैं कि किस सम्मान पर नज़र टिकी है ।                         “बीच-बीच में जड़ी-बूटी वाले बैठे हुए थे । जो अपने आपको जंगलों से आदिवासी समुदाय के बता रहे थे “।   ...