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Showing posts from November, 2023

नई पहचान

                 रंजना माँ के साथ हर-रोज़ सुबह ही उठ जाती थी ।  “उनके साथ पहले घर का काम निपटवाती , फिर स्कूल चली जाती”।     “अपनी माँ को हमेशा बोलती थी —माँ तुम  देखना मैं एक नई पहचान बनाऊँगी” ।                     उसकी माँ अनिता तो सुबह ही काम पर निकल जाती थी । “फिर वह पाँच-छह  कोठियां कर के ही घर आती थी” ।         “इसलिए रात तक ही आ पाती थी”। ठीक-ठाक कमा लेती थी । अपने और बेटी के लिए ।                   आज शाम जब घर आयी तो कुछ ज़्यादा ही थकी हुई थी । रंजना ने पूछा —माँ क्या हुआ । “आप तो बीमार जैसे लग रहे हो” ।           कुछ नहीं । काम की ही थकावट है बस । रातभर सो करौ सुबह तक ठीक हो जाऊँगी ...

सन्नाटे के साथ अंधेरा

               उठो ना , देखो तो — तुमसे मिलने  कौन आया है । यह सब बोलते हुए , “उस बेजान शरीर को बिठाने की कोशिश करने लगे” ।        राकेश को पूरी उम्मीद थी कि उनकी आवाज़ सुनकर वह “आंखें खोलेगी और बैठने के लिए  हाँ  भी भर देगी” ।                   आस-पास खड़े सब लोग दोनों को देखे जा रहे थे । सबके चेहरे पर मिलेजुले भाव थे ।          तभी  उसकी माँ ने बोला— रहने दो । “यह  सोना चाहती हैं ,जब ख़ुद उठेगी तब बात कर लेगी” ।      और फिर सब  एक-एक करके कमरे से बाहर आ गए ।                     शीला ऐसे ही चुपचाप लेटी रही ।   “सच में सो रही थी और उसके खर्राटे भी धीरे-धीरे सुन रहे थे”  । इससे मन...