सुबह

                        अध्याय  -  ३

यह देखकर वह बहुत रोई थी, पर तभी उसने शादी का फ़ैसला कर लिया था। घरवालों की मर्ज़ी के विरुद्ध उसने ये कठोर क़दम उठाना ज़रूरी समझा। रमेश की जाति दूसरी थी, इसलिए सभी रिश्तेदारों और सगे संबंधियों ने इस रिश्ते पर आपत्ति ज़ाहिर की। पर उसने तो अटल फ़ैसला कर लिया था।मॉ-बाप के विरुद्ध जाकर  उन दोनों ने शादी कर ली ।जब वह नए घर, नई दुनिया , में आयी तो बहुत ख़ुश थी। वह भगवान को बार-बार धन्यवाद कर रही थी। उसकी छोटी सी दुनियाँ हँसी-ख़ुशी के माहौल में आगे बढ़ने लगी। शादी के एक साल बाद ही बड़ी बेटी स्वीटी ने, इस घर के आंगन में फूल की तरह पॉव रखा। वो दोनों उसे देख- देखकर बहूत ख़ुश होते थे। स्वीटी के आते ही, मीरा के माँ बाप भी नाराज़गी छोड़कर उनसे मिलने आये। पुराने  गिले -शिकवे भुलाकर प्यार से गले मिले और उनसे मिलकर वह भी बहुत ही ख़ुश थी। जैसे उसने सारे संसार की ख़ुशीयॉ बटोर ली थी। स्वीटी  दो साल की थी ,तभी बेटे रोहित ने जन्म लिया। घर में दिवाली की तरह ख़ुशियाँ मनाई गई। सभी रिश्तेदार ,मित्र सब बधाई देने आये ।ऐसे ही हँसी -ख़ुशी के साथ  दिन बीत रहे थे ।सब बहुत ख़ुश थे ,ज़िन्दगी बहुत ही शकुन से चल रही थी ।पर वो दिन तो जैसे,उसकी इस हरी -भरी  नगरी को अँधेरी करने के लिए ही आया था।  To be continued…………

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