कोहरे की चादर
आज तो प्रकृति की अदा ही निराली मिली ,
कोहरे ने ढक दिया सब ,नहीं कोई जगह ख़ाली दिखी ।
बाट जोह रहे हैं सभी दिखें कहीं रोशनी कोई ,
बढ़ती देख सूर्य की लालिमा आँखें चमक गई ।।
मेरी बगिया परिंदों के शोर के बिना सुनसान है ,
पेड़ पौधे भी दिख रहें थोड़ा परेशान है ।
वो चहचहाट परिंदों की और हवा के झोंके ,
और चमचमाती धूप, इनसे ही तो रौशन जहानं है ।।
चुनौती है हवा और धूप के लिए ,फिर भी ,
कोहरे की चादर को जहाँ से सिमेट रहे हैं ।
कभी कोहरा तो कभी हवा के झोंके ,
और इसी जद्दोजहद में सूरज भी लगे हुए है ।।
सुन्दर विवरण
ReplyDeleteगजब की लेखिका हो 👍👍
ReplyDeleteप्रकृति का इससे बढ़िया विवरण हो ही नहीं सकता
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