रंग
‘होली’शब्द सुनते ही नाचने लगते हैं इंद्रधनुष से रंग
ना कोई गोरा काला ,सब एक जैसे ही रंगों में लथपथ ।
होली के दिन तो हवा भी निराली ही बहने लगती है
बच्चों से लेकर बड़ों तक को रंगीली दुनिया में ले जाती है ।
उड़ा रहा है गुलाल चल रही रंगों भरी पिचकारियाँ
रंगों में सरोबार होकर ज़ोर-शोर से खेल रहे
बज रहा हैं संगीत ,नाच -गा रही है टोलियाँ ।
बहुतों की होली के रंग ही फीके है
ना रंगों का झरोखा ही दिख रहा घर में ।
रंग-बिरंगे रंगों का एहसास ही नहीं आज उनको
ख़ामोशियों का भंडार बना हुआ है आंगन में ।
परिवार की ख़ुशी में ख़ुश तो दुःखों में दुःखी हैं
हाथ जोड़कर “दुआ”खुदा से कर रहे ,
देना ख़ुशियाँ सबको झोली भर-भर के
हमें भी रंगों से नहलाना अगली होली में
आंगन को लाल गुलाबी रंग से भर देना अगली होली में ।।
So realistic
ReplyDeleteHappy holi
ReplyDeleteHappy holi
ReplyDeleteKhusiyo per sabka hakk hai.
ReplyDeleteLekhika bhut gharai me jaker likhti hai
Keep it up manju ji
Happy holi
So true mossi ji 🥰 happy holi
ReplyDeleteVery meaningfull beautifully said...👍
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