सूद से मूल प्यारा

                     सुहानी आज  तीन साल के बाद , अपने घर यानी माँ -बाप के घर आयी है । 

         “पूरे घर को घूम-घूमकर ख़ुशी से देख रही”  ।  सब चीज़ों को  छू-छू कर चल रही ।  “ उसको लग रहा है जैसे कुछ बदला -बदला सा है” । 

         दीवारों पर भी  नया रंग हो गया है शायद । फिर उसी दीवार की तरफ़ कदम  बढ़ा दिए , जहाँ पर सारे परिवार के सदस्यों की तस्वीरें लगी हुई है ।

 “पर ये क्या ?  चौंक गई देखकर” ।

           अब वहाँ उसकी कोई भी तस्वीर नहीं है । “कहाँ गई सब” ?  

        फिर भाग कर उस कमरे में गई , जो कभी उसका और उसकी छोटी बहन का होता था । 

      “लेकिन यहाँ भी उसकी कोई भी तस्वीर, कोई सामान , कुछ भी तो नहीं था” । 

           सब हटा दिया था । शायद मम्मी-पापा ने   स्टोर में रख दिया होगा ।यह  “सोचकर खुद को ही तसल्ली दे दी” ।

        मम्मी गले तो मिली, पर  प्यार से नहीं  । “पापा ने तो दूर से ही ,  नमस्ते के  उत्तर में सिर हिला दिया” ।   

     फिर  बैठे-बैठे ही नज़र दूसरी तरफ़ फेर  ली ।

         “तीन साल में सब कुछ बदल चुका है । रिश्ते भी ,उसकी ज़िंदगी भी” । उसने और आकाश ने  मम्मी -पापा की मर्ज़ी के बिना शादी की थी । 

             “हालाँकि आकाश के  माँ बाप को एतराज़ नहीं था” । “अब उनकी एक बेटी भी थी” । जो एक साल की हो चुकी थी ।

              ज़ोरों से हँसने की आवाज़ कानों में पडते, वह अतीत से  लौट आई ।  “उसके मम्मी-पापा छोटी बच्ची के नखरे देखकर  हँसे जा रहे थे” । 

           बच्ची के आगे पीछे भाग रहे थे । “यह भूलकर कि  सुहानी की ही बेटी है” । जो  उनकी मर्ज़ी के बिना शादी कर,  घर छोड़ के चली गई थी ।

            सब हँस-हँस के लोटपोट हो रहे थे । पल भर में ही भूल गए पिछली बातों को । 

        “सुहानी की दादी सास ने-  सच ही बोला था” । एक बार अपने घर जाकर ज़रूर आ । फिर  बदलाव देखना  ।  

             नातिन को देखते ही,  माँ बाप सब भूलकर तुझे माफ़ कर देंगे । “बस एक बार धक्के से ही सही, अपने मन को घर जाने के लिए  तैयार कर” ।

       दादी की बात मानकर , अपनी बेटी को साथ लेकर आज  आ ही गई । 

            पर  छोटी सी बच्ची ने तो सारा माहौल ही बदल डाला । “अब चाय की चुस्की के साथ सब इकट्ठे एक साथ हँस-बोल रहे थे” । 

           कोई भी पुरानी बातों को याद ही नहीं कर रहा था।  सब उस नन्ही परी को देख-देखकर ख़ुश हो रहे थे । 

             आज सुहानी को बैठे-बैठे ये एहसास हुआ । “माँ बाप का प्यार कम नहीं हुआ” । बस उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जाने से नाराज़ थे । 

        सब कुछ बता कर , “अपने माँ बाप को मनाकर भी शादी कर सकती थी” ।

              पिछली बातें  भुलाकर  माँ-बाप ने आज उसे माफ़ कर दिया ।  और खुले दिल से अपनी नातिन का स्वागत किया  ।  बदलते समय में, आज भी “सूद से मूल प्यारा”  हो  गया ॥

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