एक महीने बाद ही
कल ही टिकट कटवाई है गाँव के लिए । चचेरी बहन की शादी है । अपना घर भी संभाल कर आना है । रिश्तेदारियों में भी जाना पड़ेगा ।
मैडम जी—“एक ही बार जाने में सब काम हो जाएँगे” ।
आज ही बता रहा हूँ —मैडम जी । “कल से मेरी छुट्टी है , अब तो मैं एक महीने बाद ही आऊँगा” ।
“एक ही साँस में बिना रूके सब कुछ बताता चला गया” ।
साथ-साथ पौधों की मिट्टी भी ठीक करता रहा । गाँव के बारे में सोचकर अचानक ही हँसना शुरू कर देता ।
अभी तो गया भी नहीं है । फिर भी इतना उत्साहित है ।” ऐसे व्याख्यान कर रहा था जैसे गाँव में ही बैठा है” ।
मेरे तीन बच्चे हैं । गाँव में अपनी माँ के साथ ही रह रहे है । “उनको माली नहीं बनाना —मैडम जी” । पढ़ रहे हैं। “इनाम भी लेकर आते हैं वह स्कूल से” ।
उनकी माँ भी स्कूल में चपरासी की नौकरी कर रही है । “एक और बात बताऊँ आपको, बोलकर —नीचे देखकर ज़ोरों से हंसा” ।
फिर आँखे ऊपर उठाकर बोलता — बच्चों की फ़ीस भी नहीं लगती । किताबें भी मुफ़्त मिलती है।
“ मेरी पत्नी को राशन-दवाइयाँ ,सब स्कूल से ही मिल जाता है” । सुख ही सुख है वहाँ तो ।
इसलिए तो मैं यहाँ बेफिक्र होकर काम कर रहा हूँ ।
कभी - कभी फ़ोन में शक्ल दिखाकर बातें हो जाती है । “वैसे ही दिखते हैं फ़ोन में भी , जैसे सामने बैठे दिखते हैं” ।
मैडम जी— जैसे टी-वी में दिखाई देता है ना वैसे । फिर हंस कर समझाने लगा ।
“अब तो बस एक ही सपना रह गया” ।
उनको पक्का घर बनाकर देना है । “बड़ी पढ़ाई के लिए शहर भी भेजूंगा बच्चों को । मेरी तरह मेहनत मज़दूरी करके नहीं खाएंगे” ।
“बड़े अफ़सर बनेंगे मेरे बच्चे ।
“जहाज़ में भी घूमेंगे” ।
और ये बोलकर अपने लाल दांत दिखाकर ज़ोरों से हँसने लगा । “जर्दा खा-खाकर दाँत लाल जो हो रखे थे उसके” ।
उसको यह तसल्ली थी कि मैं उसकी सारी बातें ध्यान से सुन रही हूँ । ख़ुश था इसी में ।
चाय पियोगे क्या ?
“पूछते ही बोला - दे दोगे तो पी लेंगे” ।
मेरे उठते ही, कुछ गुनगुनाते हुए काम करने लगा । ज्यों ही मैं चाय का कप लेकर पहुँची । “खुरपे को एक साइड में रख दिया” ।
और दोनों हाथों से झट से कप को पकड़ लिया। फिर जल्दी जल्दी पीने लगा । “हमने उसको टोका - आराम से लो” ।
ये लो - बिस्किट भी ले लो । “उसने एक-एक करके सारे बिस्किट चाय में डुबो- डुबोकर ख़ा लिए” । फिर दो घूँट में ही चाय भी ख़त्म कर दी ।
खुरपा लेकर अचानक से उठकर चलने लगा । अब चलता हूँ - मैडमजी । एक घर और जाना है मुझे तो आज ।
“अब तो एक महीने बाद ही आऊँगा” — जाते जाते एक बार फिर बोला । गाँव जाने की ख़ुशी चेहरे पर साफ़ झलक रही थी ।
हँसते हुए चल दिया । गेट से बाहर निकलते हुए भी गुनगुनाता ही जा रहा था ।।
Well explained mam
ReplyDeleteGud one
ReplyDeleteExcellent
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