दहलीज़

                        दहलीज़  ।  वास्तव में यह शब्द सुनते-सुनते ही बड़े हो रहे  है । “लेकिन आप भी गौर करे कि उम्र  की एक ही दहलीज़ तो नहीं होती”।   

   “ पहले बचपन तक की , फिर जवानी की , फिर प्रौढ़ अवस्था की ,और फिर  बुढ़ापे की दहलीज़” ।

                    सबसे बड़ी हो जाती है तो बुढ़ापे की ।  कोई-कोई जल्दी बुढ़ापे की दहलीज़ पर पहुँच जाता है । 

      “ तो कोई उस दहलीज़ की अनदेखी करके ख़ुद को जवान और तन्दुरुस्त रखता है”।

                 मेरे पास भी एक ऐसी ही शख़्सियत है  “जिन्होंने बुढ़ापे की दहलीज़ को ताला लगाकर रखा है” । मुझे ज़्यादातर वह सैर  करते भी नज़र आते है ।

      “खुलकर बोलते हैं —मुझे तो सैर करना पसंद है कोई और काम अच्छे से आता ही नहीं है”। 

     और बोलकर हंस देते हैं ।

                     ज़्यादातर अकेले ही रहते हैं । “ऐसा नहीं कि उनका परिवार नहीं है सब है” । बेटा-बेटी और उनके परिवार भी । कोशिश कर चुके हैं साथ ले जाने की ।

           लेकिन उन्होंने साफ़ मना कर दिया । नहीं जाना यहाँ से ,जब दिल होगा आती रहूंगी ।

   “अपने हिसाब से अपनी तरीक़े से ही ही रहना चाहती  है” ।

                          वैसे भी इनका अपना ही एक घर पहाड़ो में भी है । यहाँ तो है ही । “सबसे बड़ी बात कि इस उम्र में भी दौड़ में भाग लेते हैं” ।

        “ वो जीतती भी है ,और कभी नहीं सुना कि वो थकते हैं” ।

                       “वैसे भी वह  सरकारी अस्पताल के बहुत बड़े डॉक्टर के पद से रिटायर हुई है” ।  उन्होंने उस समय भी पूरे जोश से काम किया था । “वैसे ही अपनी यह  ज़िन्दगी भी अच्छे से जी रही है” । 

       बहुत सारे दोस्त हैं उनके । हर उम्र के । जो इनको अकेला नहीं रहने देते ।  मिलते रहते है ।

            “ एक बात और देखी मैंने उनके दोस्त भी सब ज़िंदा-दिल खुलकर ज़िंदगी  जीने वाले ही हैं” । 

           “ गेम खेलना, शेर शायरी ,कविताएँ, गाने और भी बहुत सारे कार्यक्रम है  उनकी दिनचर्या में” । 

                    लेकिन खाने-पीने का समय तय है । “कई बार तो अपना टिफ़िन लेकर बाहर  पार्क में बैठे मिलते है क्योंकि उनका टाइम हो जाता है खाना खाने का” ।

     वापिस जाकर घर कौन खा कर आये  इसीलिए साथ ही ले आते हैं” ।

   एक दिन तो उनको देखकर मज़ा ही आ गया ।        

                       “लोहड़ी-संक्रांति का प्रोग्राम चल रहा था “। पहले सबने साथ मिलकर  पूजा की । फिर सब धीरे-धीरे खाने के स्टॉलों पर बढ़ गये । 

           “कुछेक सीधा DJ की तरफ़ जहाँ छोटे बच्चे भी आगे खड़े नाच  रहे थे” । 

     “उन सभी के  बीच में  मैंने इनको झूमते हुए देखा” ।

                       रात के  9 बजे हुए थे ऊपर से  नीचे गर्म कपड़े पहने हुए थे ।” मैं भी जगह बनाते हुए उनके पास ही पहुँच गई” । 

                         इनको  गले मिलकर बधाई दी फिर इनके साथ ही झूमने भी लगी । थोड़ी देर  ऐसे  बातें करते रहे नाचते भी रहे ।      

       “ आज मैंने महसूस किया कि इन्होंने अपनी उम्र का   82 का 8 हटा दिया है  और एक लगा लिया है” ।

     “और 12 साल के बच्चे के जैसे ही बेफिक्र मज़े से झूम रही थी” ।

                       उसके बाद उनको अलविदा कर घर की तरफ़ चलने के लिए मन बना लिया है “लेकिन थोड़ी दूर जाकर फिर से मुड़कर देखा अभी भी मस्त होकर नाच रहे थे” ।

      “धीरे-धीरे ही सही पर वहाँ पर अपने मन को गेंद की तरह उछाल रही थी” ।

      “और जैसे हम सब को बोल रहे हो — बुढ़ापे की दहलीज़  होगी तुम्हारी । मेरी तो अभी भी बहुत दूर है”।

     सलाह तुम्हारे लिए भी यही है कि—दहलीज़ को दूर ही रखना तुम भी । 

                     फिर मुझे समझ  आया “उम्र की दहलीज” तो हमने ख़ुद ही बना रखी है । यह सब सोचते-सोचते मैं भी झूमती हुए जा रही थी ।


Comments

  1. बहुत सुंदर तारीफ़ के लिए शब्द नहीं

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  2. Very nice good approach towards life everyone should be like that God bless you

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  3. Bhut khub
    We should follow the same lifestyle

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  4. Best till the date
    Well written

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