Fursat ke pal

कई बार हवा का झोंका श़कुन दे जाता है 
हल्के से पौधा पतों के संग मुस्कुरा जाता है 
हवा से ज़्यादा पंछियों का शोर है 
इस चमकती धूप के हाथों में सबकी डोर है

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