Fursat ke pal

 पछिंयों ने आज शायद नई लय सीखी है,

पत्तों संग झुम के टहनियां झुली है।

काश उड़ सकू इनकी तरह ही

मन में मेरी छोटी सी ख़्वाहिश जागी है।

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