बिटु की चाची
चाची ने अपना सब कुछ अपने बच्चों के नाम कर दिया था, पर जिस घर में रह रही थी ,वह अब तक उनके पास था। बिट्टु के लिए उनके मन में ममता “मॉ “ जैसी ही थी । वे उसे बिटु ही कहकर बुलाती थी, बहुत सिखाने के बाद भी बिट्टु नहीं बोला ।
मैंने चाची के बारे में सुना था कि वह जवानी में बहुत ही सुंदर ,तंदुरुस्त और आत्म निर्भर रहने वाली महिला थी। सारा दिन काम करती नहीं थकती थी ,दिन में कई बार झाड़ू लगाना पानी से धोना इत्यादि सारा दिन लगी रहती थी ।और आज वो थोड़ा बहुत ही काम कर पा रही थी ।लगातार खड़ा होना उनके लिए अब मुश्किल था। शाम के समय चाची घर के बाहर बैठ जाती और गली के सब बच्चे चाची को देखते ही उनके पास पहुँच जाते ।चाची उन्हें कोई कहानी या क़िस्सा सुनाती, इसलिए बच्चे शाम होते ही चाची का इंतज़ार करना शुरू कर देते थे ।चाची ने एक बार एक औरत की कहानी सुनाई, जो बिलकुल उन जैसी ही थी। चाची ने उसका अंत नहीं बताया और फिर किसी दिन पर छोड़ दिया ।बच्चे कल्पना करते रहे ,कहानी का अंत क्या होगा ।
चाची पहले भी बहुत बीमार रहती थी, पर शायद आज की बीमारी उन्हें साथ लेने आयी थी । वह आज बहुत चल रही थी, पूछा तो कहने लगे कि आज बहुत दिल कर रहा है चलने- फिरने को। शाम के समय सभी बच्चे शीघ्र आकर उनके घर के बाहर बैठ गए । चाची के आने का इंतज़ार करने लगे, वह काफ़ी देर तक नहीं आयी तो बच्चों ने मिलने का निश्चय किया ।और घर का दरवाज़ा खटखटाने लगे ।फिर बच्चों ने ज़ोर लगाकर दरवाज़ा खोल दिया ।सामने चाची चारपाई पर लेटी हुई थी ,बच्चों ने आवाज़ लगायी पर चाची नहीं बोलीं । सभी बच्चों ने भागकर बिट्टु को बुलाया ,उसने आकर देखा कि चाची उन सब को छोड़कर जा चुकी थी । बच्चों की उस दिन की कहानी अब ख़त्म हो चुकी थी, जो उस दिन अधूरी रह गई थी ।
चाची की मृत्यु की सूचना उनके परिजनों को को दी गई ।अगले दिन परिवार के आने के बाद, उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया । सबकी चाची अब उनसे दूर जा चुकी थी ना लौट आने के लिए । और बिट्टु फिर से अनाथ हो गया क्योंकि माँ जैसा प्यार देने वाली उसकी चाची इस दुनिया से जा चुकी थी । पर जाने से पहले चाची ने,अपना माँ होने का फ़र्ज़ अदा किया और जिस घर में वह रह रही थी, उसको बिट्टु के नाम कर दिया। परंतु आज वह हमेशा के लिये फिर से अनाथ हो गया था
समाप्त
Very nice mossi ji ��
ReplyDeleteReally amazing 👍🏼
ReplyDelete👍👍
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