प्रकृति की गोद

उगते हुए सूरज से दिन की शुरुआत होना,

         फिर आ गया नया दिन ,सुखद अहसास होना,

खुला आसमान दूर तक उठती हुई नज़र ,

        पहाड़ों से आंखें मिलाकर ,फिर लौट आना,

  मंद मंद चलती हवा का, दे कर ठिठुरन ,

          हिला कर पेडों को, फिर पानी में लहर बन जाना।


 कोहरे को पीछे हटाकर सूर्य का आना,

         उठाकर जन-जीवन को, अपनी रोशनी में नहलाना ,

ठहरे हुए पानी का हवा से मचलना और,

       झाड़ियों से टकराकर ,छिटक कर चले जाना ,

चहचहाट परिंदों की, हिलते हुए पेडों का शोर,

       अच्छा लगा अनमोल पल प्रकृति की गोद में बीत जाना ।।

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