प्रकृति की गोद
उगते हुए सूरज से दिन की शुरुआत होना,
फिर आ गया नया दिन ,सुखद अहसास होना,
खुला आसमान दूर तक उठती हुई नज़र ,
पहाड़ों से आंखें मिलाकर ,फिर लौट आना,
मंद मंद चलती हवा का, दे कर ठिठुरन ,
हिला कर पेडों को, फिर पानी में लहर बन जाना।
कोहरे को पीछे हटाकर सूर्य का आना,
उठाकर जन-जीवन को, अपनी रोशनी में नहलाना ,
ठहरे हुए पानी का हवा से मचलना और,
झाड़ियों से टकराकर ,छिटक कर चले जाना ,
चहचहाट परिंदों की, हिलते हुए पेडों का शोर,
अच्छा लगा अनमोल पल प्रकृति की गोद में बीत जाना ।।
Adbhut
ReplyDeleteNice poem 🥰🤩
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