भटका हुआ चॉंद

रास्ता भटक गया या दुनिया को ,देखने है आया ,

रातें रोशन करने वाला चाँद ,आज दिन में निकल आया।

निहारते रहते हैं जिसको, रात भर मुड़- मुड़कर ,

दिन में आया तो देखा ही नहीं ,किसी ने नज़र भी उठाकर।

अन्धेरा दूर करने वाला ,रात को ही निहारा जाता है,

 सच ही है ये सब ,वक़्त और स्थिति पर करता है निर्भर ।

 

अब तो सूरज नहला रहा है ,धूप में संसार को ,

थोड़ी सी रोशनी साथ मिल रही है चाँद को ,

दिन ढलते -ढलते ही फिर से ,चाँद यौवन में आएगा,

अँधेरे को दूर करते हुए अपनी चाँदनी बिखराएँगा ।


चॉंद चल रहा है या बादल चल रहे ,

खुले आसमान में नज़ारे भी अद्भुत दिख रहे ,

उंगली पकड़कर ले जाना है ,तारों तक आज इसे ,

रह न जाए यही पर कभी, रातें रोशन करने वाला है ये ।

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