“काली घटा”

करवट ली है बादलों ने भी जरा सी ,

साँसें तो हवा ने भी रोकी है ,

फिर उमड़ आये बादल काली घटा बनके 

अब तो पूरी ताक़त हवा ने भी झोंकी है ।


आसमान पर बादलों का साया और गहराती ये घटा ,

ज़ोरों से चलती हवा और भी डरा रही है,

 लोग घरों में बंद हैं तो पक्षी छिपे शाखाओं में ,

छम -छम करती बूँदें संगीत नया बना रही है ।


कोरे कागज़ जैसे आसमाँ पर चित्रकारी हो रही ,

हवा का लेकर सहारा काली बदली रंग फैला गई ,

दिन में ही रात जैसा हो रहा है अनुभव ,

देखते -देखते रिमझिम करतीं बारिश ,तूफ़ान में बदल गईं ।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

दहलीज़

हैप्पी लास्ट दिन

घर के दरवाज़े