वक़्त का पहिया

 फिर घूम गया वक़्त का पहिया 

                      गिर गया फूल टूट कर डाली से ,

महक रहा था जों बगिया में अब तक

              जा पहुँचा उड़कर पूजा की थाली में  ।

खिला था जिनके साथ  महका था बगिया में

              वह रह गए देखते  छोड़ गया पल भर में ।


 याद करेंगी टहनियाँ  जिन पर था बसेरा 

               जुदा कर दिया वक़्त ने  महकते फूलों का वो डेरा ।

 छूट गया साथी, बगिया से भी बिछुड़ गया 

              सींचा बहुत माली ने पर पहिया वक़्त का चल गया  ।

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