वक़्त का पहिया
फिर घूम गया वक़्त का पहिया
गिर गया फूल टूट कर डाली से ,
महक रहा था जों बगिया में अब तक
जा पहुँचा उड़कर पूजा की थाली में ।
खिला था जिनके साथ महका था बगिया में
वह रह गए देखते छोड़ गया पल भर में ।
याद करेंगी टहनियाँ जिन पर था बसेरा
जुदा कर दिया वक़्त ने महकते फूलों का वो डेरा ।
छूट गया साथी, बगिया से भी बिछुड़ गया
सींचा बहुत माली ने पर पहिया वक़्त का चल गया ।
Vkt nhi rukta
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteDedicated to dear one🙏
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