तसल्ली
कभी -कभी हार कर भी मिलती है ख़ुशी ,
भरोसा नसीब पर न कर के मेहनत ही चुनीं ,
तलाश रहे थे भटक कर दर- दर जिसको ,
थक हार कर वही तसल्ली झोली में मिली ।
नहीं हुआ पूरा देखा हुआ सपना तो क्या,
दिखाया ही नहीं आईने ने देखना जो चाहा ,
तह धूल की साफ़ की है आईने से भी अभी
नहीं कहा हक़ में, पर रूह से तो मिलवाया ।
हालात तो किताबों से भी ज़्यादा है सिखाते ,
जो मिलता है माहौल उसी में सब रम जाते ,
देते हैं तसल्ली जीवन की परतें खोल -खोल के,
फिर बनकर सबक तक़दीर ही बदल जाते ।।
So realistic
ReplyDeleteHkikat jindgi ki
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