दिनचर्या
सड़कों पर शोर और हलचल हो रही चारों ओर ,
रेहडी से लेकर रिक्शा तक ,चले अपने काम है,
कुछ बाट जोह रहे ग्राहक की ,किसी पर बहुत ही भीड है,
कर रहे महेनत ,पर भगवान के हाथ क़िस्मत की डोर हैं।
दूर उद्यान में बैठे ,वृद्धजन साथियों संग ,
गुनगुनाती धूप में ,क़िस्से-कहानी बाँट रहे हैं ।
सिमटती जा रही धूप में मुड़ रहे हैं साथ -साथ ,
ताश के पत्तों में बादशाह -बेगम ढूंढ रहे हैं ।
लगे हैं सब अपनी दिनचर्या में ,व्यस्त हैं हर वर्ग ,
अपना दिनभर का काम और कमाई समेट रहे हैं ।
ख़ुशी और थकावट दोनों दिख रही हैं चेहरे पर,
ढलते हुए दिन के साथ अपने घरों को लौट रहे हैं ।।
Wowwwwww 👍
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