विश्वास
लोग कहते हैं मन दुखी हो ,तो ही लिखता है ,
जिसको ज़माने ने तंग किया ,वहीं बयाँ करता है ,
नया दिन नयी सुबह निकलने से लेकर रात तक,
सब शब्दों की माला में पिरोकर देता है।।
इंद्रधनुष के रंगों सी ज़िंदगी,
सुख -दुख के चक्कर में छूट जाती है ।
मोतियों की माला की तरह ,
जाने -अनजाने में बिखर जाती है ।
करके कोशिश ,बटोर के मोतियों को ,
फिर माला बनके फूलों सी महक जाती है ।
मैंने ही नहीं मेरी सोच ने भी पैर पसारे हैं ,
विचारों की दिशा बदलकर ढूँढे नए नज़ारे हैं ।
इतनी भी बुरी नहीं है ये हमारी ज़िंदगी,
मकड़ी के जाले हटाकर सँवारी फिर दिवारे है ।
You are a writer by birth
ReplyDeleteKha se lati ho roj itni achi soach
Beautiful
I have no words to express my feelings 🙏
ReplyDeleteBhut hi acha likha
ReplyDeleteGajab
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