दृढ़ निश्चय

           अध्याय २

     प्रिया एक ऑफ़िस में क्लर्क की पोस्ट पर थी ,और छुट्टी होने के बाद भी अतिरिक्त काम करती थी ताकि ज़्यादा पैसे मिले सके ।वह ख़ूब मेहनत करके अपने भाइयों को पढ़ा रही थी , उन्हें अच्छी पोस्ट पर देखना चाहती थी ।

                   प्रिया में बहुत ख़ूबियाँ थी, पड़ोसियों के साथ भी अच्छे संबंध थे और सभी उसकी मदद करने को तैयार रहते थे । उसकी मेहनत  रंग लाई और दोनों ही भाई अच्छे नंबरों से डिग्री कर गए ।नौकरी के लिए आवेदन देने के, महीने के भीतर ही दोनों को नौकरी भी मिल गई ।

                     भाइयों को नौकरी मिलते ही, उसने आराम से घर रहने की सोच ली और अपनी नौकरी छोड़ दी। ताकि वो अपने भाइयों का घर-परिवार संभालने में उनकी मदद कर सकें। अब प्रिया के दिल में एक ही बात थी उनकी शादी । वह अपने भाइयों का परिवार देखना चाहती थी ,उसने उनके लिए बहुत सपने देखे हुए थे । रिश्तेदारों की मदद से अच्छी पढ़ी-लिखीं लड़कियाँ  और अच्छे घर देख कर उनकी शादी करवा दी ।

                   लेकिन ये शादी उसके लिए ख़ुशियाँ लेकर नहीं बल्कि ‘दुखों का एक भारी बण्डल’ लेकर आईं ।पहले तो छोटी-छोटी बातें ही होती थी ,पर कल रात ही उसने बड़ी भाभी को कहते सुना था ।क्या ज़रूरत थी इन्हें नौकरी छोड़ने की, कम से कम घर का ख़र्चा तो निकल रहा था ।अभी पता नहीं कब तक हमारे साथ रहेंगी ,हम इनका यूँ ही करते रहेंगे, कल हमारे भी बच्चे होंगे और भी पता नहीं क्या-क्या क्या कहती रही ।उसके भाई चुपचाप सुनते रहे ,बाद में बस इतना ही कहा “थोड़े दिन की ही तो बात है दीदी का अनाथाश्रम में प्रबंध कर देंगे” अब तुम ज़्यादा  बातें ना करो  ‘कहीं दीदी ने सुन लिया तो’    To be continued…………


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