दूसरी दुनिया
अध्याय ४
पीड़ित और वे लोग जो ख़ासकर ज़िंदगी से परेशान हो चुके थे, वो बिमला को ढूंढते-ढूंढते उनके ‘डेरे’तक पहुँच जाते थे । हम लोगों से ‘अलग’होते हुए भी ज़रूरतमंदों की इतनी मदद करती थी कि हम भी नहीं कर सकते ।उनकी यही खूबियाँ उनको मानवता से भी ऊपर रखती थी ।
मॉं जैसी ममता रखने वाली बिमला ने उस औरत का भी साथ दिया जो जीने की इच्छा छोड़ चुकी थी । पति ने घर से निकाल दिया और माँ-बाप ने उसे आने नहीं दिया । पति के घर ही रहने को वापस भेज दिया “मर या जी” वही तेरा घर है । बेचारी बाप के घर से निकाली जा चुकी थी और पति ने दरवाज़ा बंद कर दिया था । पूरी रात छोटी बच्ची के साथ सड़क पर रोती रही । बिमला बुआ को जब यह बात पता चली तो वह बेचैन हो उठी उसी समय उस लड़की के पास पहुँच गई । पेटभर खाना खिलाया और समझाया कि हमारे साथ घर चलो । एक औरत बीच सड़क सुरक्षित नहीं हैं । पर मजबूर होते हुए भी वह सोच रही थी “किन्नर के साथ” कैसे जाऊँ ,लोग क्या कहेंगे मगर और कोई रास्ता भी नहीं था ।बुआ ने उसे अपने डेरे पर ले जाना ही उचित समझा ।उसे विश्वास दिलवाया कि तुम यहाँ सुरक्षित हो ।। हमने भी उस औरत के बच्चे को वहाँ पर बड़ा होते हुए देखा था, जो बिमला को बिमला नानी कहता रहता था ।
ऐसे सैकड़ों ही क़िस्से हैं उनकी ज़िंदगी के ।ख़ुद नाच-गाकर अपना पेट पालने वाली बिमला गरीब लोगों की मसीहा थी। आज भी घर में ब्याह-शादी होते हैं या कोई बच्चा पैदा होता है तो उनकी तरफ़ ध्यान जाता ही है,जैसे उनका “हक़” था हमारे बीच में आना बधाइयाँ देना बधाइयाँ लेना।
उनके अपने परिवार का तो कोई अता पता नहीं था ना ही उन्होंने कभी ढूंढा ।सब क़िस्मत समझ कर स्वीकार कर लिया था । फिर यहीं सुनने को मिला कि बुआ शहर छोड़ के दूसरी जगह चली गई या यूँ कहिए कि उन लोगों ने अपना ‘डेरा’ कहीं ओर जगह ही बदल लिया । गई होगी शायद, फिर किसी नये शहर में ख़ुशियाँ बाँटने ,बेसहारो को सहारा देने या फिर यूँ कहिए फिर से एक ‘दूसरी दुनिया’ को ढूंढने के लिए जो उनके लिए ही बनीं हो ।…….
समाप्त
Ese nek or sche ensan bgvan k bhut njdik hote h 🙏
ReplyDeleteBimla to mahan thi hi lakin unko शब्दों me Piro kar likhne vali manju ko बधाई
ReplyDeleteI m jaberdast fan of ur writings mam, always curious to learn more
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