कुछ नया सा

  सब्र देखा है आज सूरज और हवा का 

 बादलों संग खूब खेला है आसमान भी ,

  खिलने लगे हैं फूल उजाला होते ही

  महकने लगी हैं भीनी-भीनी ख़ुशबू भी ।।

               आईने की तरह चमक गया है सारा जहां 

                धूल तो बारिश ने जैसे हाथों से हटायीं है,

                पेड़-पौधे भी कुछ नये-नये से लग रहे 

                और उन पहाड़ों की तो, छटा ही निराली है  ।।

   जगह -जगह रुका हुआ है पानी 

   छोटे गड्ढे तो तालाब ही बन गए ,

   टपक रहे हैं पत्ते भी अब तक शाखाओं के

   नाच रहे मोर ,बगिया को चार चाँद लग गए ।।

                उग रहा है सूरज,किरणें चारों ओर फैल रही 

                बारिश की बूँदों में जाकर बेझिझक चमक गई,

                भीगा -भीगा सा है सब कुछ ही चारों ओर 

               आज फिर बारिश  कुछ नया सा अहसास दे गई ।।

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