जुगलबंदी
टहलते हुए जंगल में
उस अकल्पनीय दृश्य ने खींचा ध्यान मेरा
मोर कोयल संग ,इकट्ठे होकर परिंदे
जंगल में घूम-घूमकर शोर मचा रहे ,
फिर भीनी भीनी ख़ुशबू महसूस हुई
नज़रें ऊपर उठी और क़दम बढ़ते चले गए ,
जंगल में गुलमोहर के पेड़ों पर
फूल आ रहे हैं झोली भर-भर के
गिर गई पत्तियाँ वृक्षों से
रंग बिरंगे फूल टहनियों पर सज गए ,
लाल ,गुलाबी ,जामुनी, नीला ,पीला
पूरे जंगल का ही तो रूप बदल गए ,
कोयल ने भी शोर मचाकर मोहर लगायी है
‘राजा पेड़ आम’ की नयें फलो से शाखाएँ भर आयी है ,
पक्षियों ने कर जुगलबंदी महफ़िल सजाई हैं
पेड़ों की शाखाओं पर कूद कूदकर कोयल ने तो
नई फ़सलों की ‘बधाइयाँ ‘ भी गाईं है ।
आज परिंदों और झूमते पेड़ों की “जुगलबंदी” में
वक़्त बिताना लगभग सार्थक हो गया
इस अद्भुत नज़ारे से मन का कोना-कोना
नई स्फूर्ति भर कर प्रफुल्लित हो गया ।।
Kudhrat k rung 👍
ReplyDeleteसुन्दर वर्णन
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