हादसे
बेवजह ज़िंदगी में जगह बना लेते हैं
बिना आहट किये सब उलट-पुलट जाते हैं
कुछ हादसे वक़्त बदलते ज़रूर है पर,
बदला हुआ वक़्त ख़ुद,
एक हादसा बन जाता है ।
रात भी नयीं आती है,
ख़्वाब भी नया आता है
बीती हुई यादों का झोंका
हवा जैसे आता-जाता रहता है ।
ज़िंदगी कम पड़ जाती हैं
दुनियादारी समझने के लिए
कभी समझा नहीं पाते तो ,
कभी समझ भी नहीं आता है ।
हल्की सी मुस्कुराहट लबों पर
छोटी सी माफ़ी से सब सम्बल भी जाता है ।
“हादसे” भी ज़रूरी है ज़िंदगी में
अपने-पराए दिखाते हैं
साथ भी देते हैं ,बहुत से लोग
कुछ दिलासा देकर चलें भी जाते हैं ।।
Reality of life 👍
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