अदाकार

लगता है कभी कभी रंगमंच है ज़िंदगी 

                करने पड़ते हैं बहुत से ‘किरदार’बारी बारी से।

बेहतरीन करते करते रह जाती हैं ख़ामियाँ अक्सर 

               उम्मीदें तो बहुतों को है हम जैसे अदाकारों से ।


बेवजह भी राह चलते हुए मिलते हैं बहुत से लोग

               कुछ सिखा जाते बातों से, तो कुछ सबक से।

चेहरे पर नहीं आते भाव मन की गहराई के 

               डूबना पड़ता है तह तक इनको निभाने के लिए।

 रहते हैं मुखौटा लगाकर स्वाभिमान पीछे छोड़ के 

           नचाती है दुनिया फँसाकर,अलग अलग क़िस्सों में ।

 समय भी उनका होता है कहानी भी होती हैं उनकी

                      नहीं बच पाते  , बेहतरीन “अदाकार” भी 

                                         अचानक आए इम्तिहानों से ।।

Comments

Popular posts from this blog

दहलीज़

हैप्पी लास्ट दिन

घर के दरवाज़े