मुक़ाम
सुबह उठते ही मन में चल पड़ती है जद्दोजहद
आज वो करना ही है जो रह गया था कल,
नहीं सोचना क्यों बुरा हुआ था बिते हुए दिन
आगे बढ़ना है नहीं रूकने देना अपने कदम ।
अब तो हासिल करना है वो , मुक़ाम ही
राहो में आयेंगी उलझने सरल कुछ भी नहीं
‘ कोशिश नहीं रोकनी ‘ मिलेगी मुसीबतें बेहिसाब ही ।
अपनी मदद ख़ुद करेंगे तभी साथ दूसरे भी देंगे
आगे बढ़कर नहीं पकड़ेंगे तो ,हाथों से छूट जाएगा ही ।
कोई सीढ़ियाँ दिखाएगा तो कोई रास्ता बताएगा
दिखी है लौ प्रकाश की उजाला भी मिल जाएगा ।
नज़दीक पहुँचते मुक़ाम के , मुक़द्दर भी बदल जाएगा
भरोसा कर लिया ‘ख़ुद पर’ अब तो,
रास्ता ख़ुद-बेख़ुद “मुक़ाम” तक पहुँचायेगा ।।
Thanks beh ,i really need this motivation
ReplyDeleteAwesome and motivational
ReplyDeleteGood 👍
ReplyDeleteso good!!
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