ख़त्म ही नहीं होंगी
ज़िंदगी तो खाली पन्ने है
चाहते है मनचाही कहानी ही लिखना ,
गुज़ारनी या फिर जीनी है सुकून से
सलाह मशवरा भी खुद से ही तो है करना ।
कभी बुलाकर कभी बिन बुलाए ,आती रहेंगी जीवन में
इन मुसीबतों का क्या, ये तो कभी ख़त्म ही नहीं होंगी ।
सुख चैन से होते जाए बसर
ना लौटेंगे फिर ये अनमोल पल,
आती रहेंगी छन-छन कर खुशियां
बस पकड़े रखना उम्मीदों का आँचल ।
बुनने मत देना कच्चे धागों को,अपने रिश्तों की नाज़ुक डोरी
लगाते ही रह जाओगे वो गाँठे , जो कभी ख़त्म ही नहीं होंगी ।
दिन भर की भाग दौड़
उस पर कमर तोड़ मेहनत ,
न चैन से बैठने की फ़ुरसत
ना ही साँस लेने की मोहलत ।
जब मिल जाए कुछ पल राहत के ,वो पल ही जी लो
बढ़ती घटती रहेंगी , यूँ ही ख़्वाहिशें , उनका क्या
वो तो कभी “ख़त्म ही नहीं होंगी” ।।
Divine feeling after reading this one
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