दबा है दिल में
साल तो बहुत दूर
घंटों का ही नहीं पता चल रहा ,
बीत रहे हैं बिना आहट किये ही
नहीं होता महसूस पर जा तो रहे है ,
आँखें भी टकटकी लगाये रहती है
‘दिखे तो कोई’ , खुलते बन्द होते दरवाज़े पे ।
कहना तो चाहते है
कहें भी तो किससे ?
पास से निकल रहे सब ‘छूकर जज़्बातों’ को ,
सचेत भी कर रहे है आते-जाते सभी
‘ मत रहना ख़ामोश’ यूँ ही
बाँट लेना अपने दबे जज़्बात ‘किसी अपने से’ ,
बाट जोह रहे उस साथ की जो-
सिर पर हाथ रख,
पीठ थपथपा दे प्यार से ।
बहुत कुछ है दिल में कहने सुनने को
तलाश भी रही है रूह मेरी
वो प्यार भरी नज़रें
वो बढ़ती बाँहें
और वो अपनापन
एक अरसे से जो “दबा है दिल में”
उसमें साझेदारी करने को ।।
Tooooooo gud
ReplyDeleteGreat 👍
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