बाज़ार के दिन

 हो गई चहल -पहल शुरू फिर से

 रौनक़ बाज़ार में ही नहीं, गलियों में भी ,

 छोटे बड़े सभी दुकानदारों ने 

सजा दिए अपने गलियारे ,

नहीं रहे रेहड़ी-फड़ी वाले भी पीछे ।


दुकान जितना सामान

 एक छोटी सी जगह में जमा लिया ।

दिखने लगा रंग बिरंगा 

अब दूर तक बाज़ार सारा ,

  ग्राहकों को रिझाने के लिए 

   कर रहे जतन , बढ़ाकर अपना दायरा ।


ख़ुशी दिख रही है चेहरे पर 

असली दाम पर छूट देखकर ,

ख़रीदारी की लिस्ट, बच्चों की भी बढ गई 

 नया कुछ तो,ढूँढ रही है नज़र भी बच्चों की ,

 भागदौड़ करते नन्हे  मुन्नों ने 

 माहौल ही ख़ुशनुमा बना दिया ।


पलट रहे है शायद

सूनसान पड़े “बाज़ार के दिन” भी

लग रहा है जाती हुई ठंड ने

 रंग जमाना  शुरू कर ही  दिया ॥


 

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

दहलीज़

हैप्पी लास्ट दिन

घर के दरवाज़े