खोखले रिश्ते


                  कल तक भी, उसे अपने ऊपर गर्व था कि “उसके तो चार-चार भाई” है । सभी एक से बढ़कर एक,धनवान और ख़ुशहाल ।पर आज जब उसको उनकी ज़रूरत थी तो भाई उसके आसपास भी नहीं आये । 

  ”आख़िर लाखों  लग सकते थे” बहन के परिवार का इलाज करवाने में ।इसलिए अनजान बनकर बैठे थे ।

           रेल दुर्घटना में हुए हत्या कांड में उसका अपना परिवार बुरी तरह घायल हो गया था । उसके इकलौते बेटे और पति की “अस्पताल में मौत से लुकाछुपी चल  रही थी” । 

       और इधर वह भगवान से दुआएँ किए जा रही थी कि “कोई तो उसकी सहायता करे” । भगवान किसी को तो भेज दो 

  पर जहाँ भी गई वहीं से “ख़ाली झोली लिए” ही वापिस आ गई । 

                अब बस एक आस ही थी केवल अपने भाइयों से,”जिन्होंने उसकी तरफ़ देखना भी ज़रूरी नहीं समझा”  । फिर भी  लाचार होकर ,सहायता के लिए उन्हीं भाइयों के पास जाने को मजबूर हो गई । “पैसों की मदद के लिए” और कोई चारा भी नहीं था ।

                   भाइयों ने दिखावे की आवभगत की । लेकिन जब उसने अपनी आप-बीती सुनाई ,  तो किसी के मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला । “जैसे उसकी बातें सुनी ही ना हो” । और पैसे का तो ज़िक्र किसी ने भी नहीं किया । आज उसे अपने  माँ-बाप भी याद आ रहे थे ।

 अब वह “घर भी उसके माँ बाप का नहीं भाइयों का” था । 

              वहाँ से उसकी “आख़िरी उम्मीद भी ख़त्म हो गई” थी । निराश होकर चल पड़ी  भगवान का नाम लेते हुए , फिर से अस्पताल की तरफ़ । 

        भाइयों को हमदर्दी जताने के लिए अस्पताल आना पड़ा , “समाज को दिखाने के लिए” , लेकिन पैसे की कोई मदद नहीं की ।

       जैसे-तैसे रात काटी । सुबह होते ही अपना मकान गिरवी रखा और अपने गहने सुनार के पास बेच दिये । थोड़े रूपयों का इंतज़ाम तो कर ही लिया ।

                 अभी थक-हार कर पर,  मन में उम्मीद लिए  अस्पताल के अन्दर पैर  रखा ही था तभी “डॉक्टरों की भागदौड़ देखकर चौंक सी गई” । पीछे-पीछे भागने लगी “बदहवास सी होकर” ।

    अचानक सब रुक-सा  गया कमरे में ,मशीनें भी शान्त हो गई ।अब “डॉक्टर और भगवान के बस में भी कुछ नहीं” था ।

               कुछ ही पलों के अंदर पति और बेटा उसको छोड़कर जा चुके थे ।अस्पताल के उस कमरे में पूरी तरह “ सन्नाटा पसर गया “। एक एक करके डाक्टर, नर्स सब बाहर चले गए ।वह अकेली ही गुमसुम पलंग पकड़ें खडी रह गई ।

    पति और बेटे की मृत्यु के साथ ही उसके बाकी बचें सारे “खोखले रिश्ते” भी ,आज ख़त्म हो गए थे  ॥

                                 

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